ताजमहल प्रेम की नहीं बल्कि “दलितों पर अत्याचार” की निशानी है, दलितों और पिछड़े वर्ग के 40000….




मक्कार इतिहासकार ताजमहल की बहुत प्रशंसा करते है 
ताजमहल को प्रेम की निशानी बताते है, कहते है की शाहजहां ने अपनी पत्नी मुमताज़ महल की याद में ताज महल बनवाया, ये अद्भुत प्रेम की निशानी है 

पर यहाँ इतिहासकार बहुत सी चीजों को मक्कारी से छुपा लेते है 
मुमताज़ महल शाहजहां की कई पत्नियों में से एक  पत्नी थी, असल में मुमताज़ शाहजहां के सैनिक की बीवी थी 
पर हवसी शाहजहां ने उसे एक दिन देख लिया, सुन्दर होगी और हवस में शाहजहां ने उसके पति को 
मरवाकर उस से जबरन निकाह कर लिया 

और मुमताज़ से इतना प्रेम की शाहजहां ने उस से 13 बच्चे पैदा किये, और वो 14वे बच्चे के प्रसव पीड़ा के दौरान मर गयी, हर साल उस से 1 बच्चा निकालता रहा शाहजहां 
और सुनिए जैसे ही मुमताज़ मरी, शाहजहां ने उसी की बहन से शादी भी कर ली,  ऐसा तो गज़ब का प्रेमी था हवस का मौलवी शाहजहां 

अब आगे जानिये इस दरिंदे के असली करतूत को जो इतिहासकार आपके सामने नहीं रखते 
है कुछ इतिहासकार इतना जरूर कह देते है की, ताजमहल बनने के बाद शाहजहां ने  मजदूरों के हाथ कटवा दिए थे ताकि कोई और ताजमहल न बनने पाए 

पर कितने मजदूरों के हाथ दरिंदे ने कटवाए, और ये कौन से मजदुर थे ?

कुल मिलकर शाहजहां ने 40000 मजदूरों के हाथ कटवाए 
इस दरिंदे ने न सिर्फ मजदूरों के हाथ कटवाए, पर जिन लोगों ने ताजमहल को बनाने की सामग्री बेचीं थी 
उन लोगों के भी हाथ कटवा दिए, और 3000 को तो शाहजहां ने क़त्ल भी करवा दिया 

और 40000 में से अधिकतर मजदुर दलित और पिछड़ा वर्ग के थे 
अधिकांश मजदुर आगरा और राजस्थान के इलाके के ही थे, इनमे बुंदेलखंड के भी मजदुर लगे हुए थे 
90% से अधिक मजदुर दलित ही थे, और दलितों के हाथ शाहजहां ने कटवा दिए 
हाथ काटने के बाद इन्फेक्शन और अन्य कारणों से 10000 से अधिक दलितों की मौत भी हुई 

ताजमहल किसी भी तौर पर प्रेम की निशानी नहीं है 
क्यूंकि शाहजहां को मुमताज़ से प्रेम नहीं केवल हवस था, और ताजमहल असल में 
दलितों पर अत्याचार की एक निशानी है, जब भी आप ताजमहल देखें समझिये की 40000 दलित और पिछड़े वर्ग के हिन्दू मजदूरों के हाथ दरिंदे ने कटवाए है 

और ये जानकारी इतिहासकार बड़ी ही मक्कारी से छुपा लेते है, क्यूंकि ये जानकारी लोगों के सामने  रखने से सेकुलरिज्म खतरे में पड़ता है