39 लाख 40 हज़ार योद्धा तथा सैनिक मरे, पर कौन से योद्धा युद्ध के बाद जीवित बचे ?

कुरुक्षेत्र के महायुद्ध – ‘महाभारत’ को यदि इतिहास के सबसे बड़ा युद्ध में से एक कहा जाए तो कुछ गलत नहीं होगा। भारत की गाथाओं में महाभारत का जो विवरण है, वो न सिर्फ किसी को आकर्षित करता है, बल्कि पल भर के लिए डरा भी सकता है। 90 के दशक में बी. आर. चोपड़ा का सीरियल ‘महाभारत’ हमें इस महायुद्ध के काफी निकट ले आया।
कौरवों और पांडवों के इस महारण में आप और हम कल्पना भी नहीं लगा सकते कि क्या-क्या हुआ होगा। इस युद्ध में देश-विदेश के लाखों राजाओं, महाराजाओं और सैनिकों ने भाग लिया था। इतिहास के पन्नों के अनुसार महाभारत के युद्ध में 39 लाख 40 हजार योद्धा मारे गए।
मगर जानते है कि युद्ध के अंत में कितते योद्धा जीवित बचे? बारह… सिर्फ 12!!
युधिष्ठिर, भीम, अर्जुन, नकुल और सहदेव– इस युद्ध में विजयी हुए। हालांकि इन पाँचों के नाम और गुण अलग-अलग है, मगर पहचान सभी की ‘पांडव’ के रूप में ही है। अर्जुन के सारथी के रूप में श्रीकृष्ण ने युद्ध में बिना हथियार उठाए पांडवों का साथ दिया, नारायण के भक्त सात्यकी
धृतराष्ट्र के पुत्र, युयुत्सु, दुर्योधन के बाद सबसे बड़ा कौरव था। हालांकि युद्ध समय होने से पहले ही उसने पांडव की ओर से युद्ध करना उचित समझा।
पांडवो की तरफ से कुल मिलाकर युधिष्ठिर, भीम, अर्जुन, नकुल और सहदेव, कृष्ण, युयुत्सु और सात्यकी यानि 8 लोग जीवित बचे 
कौरव सेना की ओर से युद्ध करने वाले महारथी अश्वत्थामा ने युद्ध मर्यादाओँ का उल्लघंन करते हुए रात्रि में पांडवों के शिविर पर आक्रमण किया। कहा जाता है कि अश्वत्थामा युद्ध के पश्चात् कलयुग के आने की घोषणा की थी।
वृषिणी वंश के एक और योद्धा, जिसने कौरवों के ओर से युद्ध किया था। कृतवर्मा ने पांडवो सेना के विनाश करने में अश्वत्थामा का प्रमुख सहयोग किया।
कुलगुरू कृपाचार्य ने युद्ध करने के लिए कौरव सेना का चयन किया। हालांकि युद्ध के पश्चात् अभिमन्यु पुत्र परीक्षित को शिक्षा भी कृपाचार्य ने ही दी। परीक्षित के अंत के बाद ही कलयुग का प्रारंभ हुआ।
कर्ण का पुत्र वृषकेतु हालांकि वृषकेतु ने कौरवों को ओर से किया, किंतु कर्ण की मृत्यु और युद्ध के पश्चात् वो पांडवो के काफी निकट आ गया 
युद्ध के बाद अर्जुन ने वृषकेतु को काफी स्नेह दिया 
कौरवों की तरफ से अश्वत्थामा, कृतवर्मा, कृपाचार्य और वृषकेतु  बचे 

इन 12 के अलावा सभी राज, सेनापति, सैनिक युद्ध में मारे गए