रमजान इस्लामिक नहीं बल्कि अरब का पागन त्यौहार, और पागन लोगों ने हिन्दुओ से सीखा था व्रत करना

इस्लाम तो मोहम्मद के बाद शुरू हुआ, 6वि सदी से पहले इस्लाम नहीं था, उस से पहले भी अरब के लोग थे, और वो कई तरह के अन्य धर्मो और विश्वासों में मानते थे, सऊदी अरब में भी लोग या तो पागन थे या यहूदी थे, और अन्य कबीलाई लोग थे

अब आज वर्तमान में मुस्लिम रमजान का त्यौहार मानते है, भारत पाकिस्तान में इसे रमजान कहा जाता है पर दुनिया भर के मुस्लिम इसे रमादान कहते है, पर ये रमजान जो है ये असल में इस्लामिक नहीं बल्कि पागन त्यौहार है, और इस्लाम से भी पहले से अरब के लोग इस मौसम में इस त्यौहार को मनाते थे, असल में इ त्यौहार व्रत रखने का एक नियम भर है

सुबह खाना, दिन भर व्रत रखना और फिर शाम को खाना, दिन में खाना पीना नहीं होता, ये एक व्रत कला है, और इस्लाम जब नहीं था तो अर्ब के इलाके में पागन लोग इस कला को निभाते थे

 


व्रत करना असल में पागन भी नहीं बल्कि हिन्दू कला है, जब इस्लाम अरब में नहीं था, तो पागन धर्म ज्यादा था, तो वहां के लोग भारत आया करते थे, भारत में वो कई चीजें सीखने आते थे, और पागन लोगो ने भारत में एक कला सीखी, वो थी व्रत कला

भारत में व्रत करने की शुरुवात ऋषि मुनियों ने की थी, ये शरीर को ठीक करने के लिए कई तरह की बिमारियों से लड़ने के लिए किया जाता था, व्रत से कई तरह के फायदे भी होते है, पाचन से लेकर कई तरह के शारीरिक फायदे, पागन लोगों ने भारत से ये व्रत कला सीखी

अरब में इसे पागन लोग करने लगे, और जब इस्लाम मुहम्मद ने बनाया तो फिर इसी व्रत कला को रमादान कहा जाने लगा, जिसे भारत में रमजान कहते है, इस्लाम से भी पहले से ये व्रत कला अरब के इलाके में होता था, और पागन लोग इसे करते थे, पागन लोगों का इलाका थोडा अलग था, वो ज्यादा गरम और रेतीला था इसलिए उन्होंने हिन्दुओ से व्रत कला सीखी और पुरे महीने का व्रत करना शुरू किया, आज मुस्लिम समाज इसे रमजान/रमादान कहकर निभाता है

अरब के मुस्लिमो के पूर्वज पागन ही थे, और पागानो के पूर्वज तो हिन्दू ही थे, इसलिए अगर आप बड़ी दृष्टि से देखें तो पागन लोगों ने हिन्दुओ से व्रत कला सीखी और अरब के इलाके में व्रत करना शुरू किया, बाद में जब इस्लाम बना तो इसे रमजान बना दिया गया