कश्मीर में घुमने फिरने जाना यानि आतंकियों और अलगाववादियों को फंडिंग देना : प्रशांत पटेल, वकील

जम्मू कश्मीर और खासकर कश्मीर यहाँ पर लोग घुमने फिरने जाते है, ये वो कश्मीर है जहाँ से 8 लाख के आसपास के निवासियों को हिंसा करके इसलिए भगा दिया गया क्यूंकि वो हिन्दू धर्म को मानने वाले थे, अब इस कश्मीर में 99% से अधिक संख्या मुस्लिम समुदाय की ही है

और कश्मीर एक ऐसा इलाका है जहाँ पर भारत के खिलाफ जहर उगला जाता है, भारत के खिलाफ और पाकिस्तान के पक्ष में गतिविधियाँ चलाई जाती है, जहाँ पर रोजाना हमारे सेना के जवानों को घायल किया जाता है, देश द्रोही हरकतें आम सी बात है

और इस कश्मीर का जहाँ पर ये सब हो रहा है वहां पर भारत के कोने कोने के लोग घुमने फिरने जाते है, वकील प्रशांत पटेल का कहना है की ऐसा करना यानि आतंकियों और अलगाव वादियों की फंडिंग करना है, कश्मीर में लोग घुमने जा रहे है इस से वो आतंकियों और अलगाववादियों को डायरेक्ट फंडिंग कर रहे है और इसी फंडिंग से आतंकी और अलगाववादी अपनी गतिविधियाँ भी चला रहे है

चीन और पाकिस्तान से तो आतंकियों और अलगाववादियों की फंडिंग हो ही रही है पर भारत के अन्य इलाकों से कश्मीर घुमने जाने वाले लोग भी इनको फण्ड कर रहे है

 


उदाहरण के तौर पर जब आप कश्मीर जाते है, जैसे गुलमर्ग, अनंतनाग, श्रीनगर इत्यादि, तो वहां पर रिक्शे से लेकर होटल और शौपिंग पर आप खर्च करते है, ठहरने, खाने पर खर्च, और ऐसा करते हुए आप वहां हजारों और लाखों रुपए दे रहे है, और ये पैसा आपकी जेब से आखिर जा कहा रहा है, घूमते फिरते हुए आप इस बात को शायद सोचते नहीं होंगे

हुर्रियत के लोग अधिकतर व्यापार चलाते है, इनकी ही दुकाने है, इनकी ही होटल रिक्शे और बाकि सब है, और आप का पैसा जो आप घुमने फिरने के नाम पर, मौज मस्ती के नाम पर देते है ये सीधे हुर्रियत वालो के पास पहुँचता है और फिर हिजबुल मुजाहिदीन तक, आप उन लोगों की डायरेक्ट फंडिंग करते हो जो हमारी सेना पर पत्थर फेंकते है

अगर आतंकियों और देशद्रोहियों को ख़त्म करना है तो उनकी फंडिंग को ख़त्म करना होगा, पर आप तो घुमने फिरने मौज मस्ती के नाम पर उनकी फंडिंग कर ही रहे हो, ऐसे में समाज को एक बार सोचने की जरूरत है तभी कश्मीर में देशद्रोह की घटनाएं कम हो पाएंगी