आतंकी का मजहब नहीं होता वो सेक्युलर होता है इसलिए उसे दफनाया नहीं जाना चाहिए : अश्विनी उपाध्याय

अक्सर कहा जाता है की आतंकवाद का कोई मजहब नहीं होता, पर क्या ये डाइलोग सत्य भी है इसपर एक बड़ा प्रश्नचिन्ह खुद सेक्युलर नेता ही लगा देते है, अभी पिछले ही दिनों जम्मू कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती ने केंद्र सरकार से मांग करी की रमजान का महिना आ रहा है इसलिए आतंकियों के साथ सीज फायर कर लिया जाये

हालाँकि केंद्र सरकार ने महबूबा की मांग को ख़ारिज कर दिया और सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने तो यहाँ तक कह दिया की आतंकियों की सफाई का काम जारी रहेगा चाहे रमजान हो या ईद, आतंकियों को छुट चाहिए तो वो सरेंडर करें, अन्यथा सेना नहीं रुकेगी

इस मामले पर वरिष्ट वकील अश्विनी उपाध्याय ने भी अपनी राय रखी है, उन्होंने कहा है की चाहे रमजान का महिना हो या ईद हो आतंकियों की सफाई का काम जो सेना कर रही है वो जारी रहना चाहिए, उपाध्याय ने कहा की आतंकी का कोई मजहब नहीं होता है न, इसलिए रमजान और ईद से कुछ लेना देना नहीं होना चाहिए

 


उपाध्याय ने तो यहाँ तक कहा की आतंकी का तो कोई मजहब होता ही नहीं आतंकी तो सेक्युलर होता है इसलिए आतंकी को दफनाना (इस्लामी रीति) नहीं चाहिए, बल्कि उसे इलेक्ट्रिक शव दाह गृह में जला देना चाहिए, अब आतंकी का कोई मजहब होता ही नहीं तो इस्लामिक रीति से दफनाकर उसका अंतिम संस्कार करना भी नहीं बनता है

पर अक्सर यही देखा जाता है की आतंकियों को पूरी मजहबी रीति से ही दफनाया जाता है तो ये प्रश्न उठा देता है की आतंक का मजहब होता है या नहीं