अलगाव, नफरत, बंटवारे की राजनीती की जनता ने नकारा, कर्णाटक में टीपू सुल्तान हारा

कर्णाटक में पिछली बार जनता ने कांग्रेस को 122 सीट दी थी, सिद्धारमैया मुख्यमंत्री बने थे, वो चाहते तो अच्छा कार्य करते, काम अच्छा करते तो जनता फिर से सत्ता देती, बीजेपी की कई सरकारें ऐसी है जैसे गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ इत्यादि, यहाँ काम अच्छा होता है तो जनता वापस सरकार बनाती है

पर कांग्रेस ने कर्णाटक में काम नहीं किया, बस इनके नेताओं की जेबें ही भरी, वो हजारपति से सीधे करोडपति, और जो करोडपति थे वो सीधे अरबपति और जो अरबपति थे वो खरबपति हो गए

कांग्रेस ने कर्णाटक में चुनाव जीतने के लिए दुसरे रास्ते अपनाये, कांग्रेस ने बंटवारे की, नफरत की, अलगाव की राजनीती की –

  1. कांग्रेस ने जम्मू कश्मीर की तरह कर्णाटक में भी अलग झंडा बनाया
  2. कांग्रेस ने कर्णाटक में हिंदी के प्रति नफरत फैलाया, और बंगलुरु मेट्रो से हिंदी के बोर्ड उखडवा दिए
  3. कांग्रेस ने उत्तर भारत बनाम दक्षिण भारत का मुद्दा बनाया, योगी, अमित शाह, मोदी को बाहरी बताया – जबकि सोनिया गाँधी और राहुल गाँधी को स्थानीय बताया
  4. कांग्रेस ने लिंगायतों को भी तोड़ने की कोशिश करी, ताकि बीजेपी के वोट कम हो जाये और कांग्रेस को फायदा हो
  5. जिग्नेश मेवनी और प्रकाश राज जैसे लोगों से नफरत भरे कार्यक्रम करवाए
  6. मस्जिदों और मदरसों से कांग्रेस के पक्ष में फतवे दिलवाए, चर्च से भी कांग्रेस के पक्ष में फतवे दिलवाए

जनता का काम छोड़कर, किसानो की भलाई, युवाओं को रोजगार छोड़कर कांग्रेस ने ऊपर दी गयी हर प्रकार की राजनीती की, पर जनता ने भी साफ़ कर दिया की वो ये सब नहीं चाहती, जनता ने कांग्रेस को साफ़ कर दिया की वो हिंदी के खिलाफ नहीं, लिंगायतों ने भी साफ़ कर दिया की वो हिन्दू ही है, दलितों ने भी साफ़ कर दिया की जिग्नेश मेवनी और प्रकाश राज जैसे लोग उनके नेता नहीं, कर्णाटक की जनता ने ये भी साफ़ कर दिया की योगी, मोदी और अमित शाह नहीं बल्कि सोनिया गाँधी है बाहरी

कांग्रेस ने जो राजनीती सत्ता में रहते हुए की कर्णाटक की जनता ने आज वोट देकर कांर्गेस को उसका नतीजा दे दिया और जनता ने बता दिया की वो अलगाव, नफरत, तुष्टिकरण के साथ नहीं है और कांग्रेस को सत्ता से बेदखल कर दिया गया, आज लोकतंत्र की जीत हुई नफरत अलगाववाद की हार हुई